नई दिल्ली। ओला और उबर जैसी टैक्सी एग्रीगेटर कंपनियों के
द्वारा रेट को लेकर की जाने वाले मनमानी पर लगाम लगाने की तैयारी है।
पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन पॉलिसी को आसान बनाने की लिए सरकार नियमों में कुछ
बदलाव कर सकती है। ऐसा होने पर राज्य सरकारें ऐप बेस्ड कैब सर्विस देने
वाली कंपनियों के लिए किराए की मैक्सिमम लिमिट तय कर पाएंगी।
आइए जानते हैं कि टैक्सी एग्रीगेटर कंपनियों को रेग्युलेट करने की क्या है तैयारी......
बता दें कि ऐप बेस्ड कंपनियों द्वारा अलग-अलग राज्यों से राइडर्स से
मनमाने चार्ज लेने की शिकायतें लंबे समय से आ रही हैं। राइडर्स की शिकायत
है कि पीक टाइम में ये कंपनियां बेस फेयर का 3 से 5 गुना तक सर्ज प्राइसिंग
के रूप में अतिरिक्त वसूलती हैं। वहीं कैंसिलेशन चार्ज के अलावा कुछ हिडेन
चार्ज भी हैं, जिससे राइडर्स की जेब काटी जा रही है। वहीं सेफ्टी को लेकर
भी सवाल उठ रहे हैं। इसके बाद कर्नाटक ने पहले इन्हें रेग्युलेट किए जाने
की पहल की।
केंद्र सरकार की क्या है तैयारी
-ओला और उबर को रेग्युलेट करने के लिए केंद्र सरकार मोटर व्हीकल्स
एक्ट में बदलाव करने की योजना बना रही है। इसके तहत एक्ट के धारा 93 में
संशोधन का प्रस्ताव है।
-मोटर व्हीकल्य एक्ट में बदलाव होने से राज्यों को यह अधिकार होगा कि वे टैक्सी एग्रीगेटर कंपनियों को रेग्युलेट कर सकें।
-मोटर व्हीकल्स एक्ट में बदलाव करने से टैक्सी एग्रीगेटर्स की नई डेफनिशन भी तय होगी।
-असल में उबर इस बात को लेकर सवाल उठा चुकी है और उसका कहना है कि वह टेकनोलॉजी बेस्ड कंपनी है।
-बता दें कि इन्हें रेग्युलेट करने का मसला राज्य सरकारों है, केंद्र सरकार नियमों में बदलाव कर राज्यों को अधिकार दे सकती है।
राज्य सरकारें कर सकती हैं ये बदलाव
दिल्ली ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के एक सीनियर अफसर ने जानकारी दी कि
इस मसले पर पिछले महीने भी कुछ राज्यों की केंद्र सरकार से बात हो चुकी
है। तब केंद्र की ओर से नियमों में बदलावा के जरिए एक स्पष्ट पॉलिसी बनाने
के संकेत मिले थे। जानकारी के अनुसार आगे इस तरह के बदलाव हो सकते
हैं.....
-मोटर व्हीकल्स एक्ट में बदलाव के बाद राज्य सरकारें अपने राज्य में किराए की मैक्सिमम लिमिट तय कर सकेंगी।
-सर्ज प्राइसिंग को भी लिमिट के दायरे में लाया जा सकेगा।
-सर्ज प्राइसिंग को पूरी तरह खत्म करने की बजाए, इसकी मैक्सिमम लिमिट मैक्सिमम बेस फेयर से 50 फीसदी मैक्सिमम तय किया जा सकता है।
-ड्राइवर्स के लिए ड्रेस कोड तय किया जा सकता हे।
-कुछ राज्यों में कैब में मीटर फेयर भी लगाना जरूरी किया जा सकता है।
-कस्टमर्स की सेफ्टी के लिहाज से कैब में जीपीएस जरूरी किया जा सकता है।
-टैक्सी एग्रीगेटर्स द्वारा लिए जाने वाले कैंसिलेशन चार्ज को खत्म किया जा सकता है।
-किसी भी तरह की कंप्लेंट के लिए 24 घंटे के लिए कॉल सेंटर जरूरी किया जा सकता है।
कर्नाटक पर है दूसरे राज्यों की नजर
-बता दें कि पिछले दिनों कई राज्य ने टैक्सी एग्रीगेटर कंपनियों को
लेकर आने वाली शिकायतों पर इन्हें रेग्युलेट करने की बात कह चुके हैं।
हालांकि अभी राज्यों की कर्नाटक पर नजर है।
-असल में कर्नाटक पहला राज्य है, जिसने उबर और ओला जैसी कैब सर्विस देने वाली कंपनियों के लिए नियम तैयार किए हैं।
-उबर ने नियमों से कुछ छूट पाने के लिए हाई कोर्ट में एफिडेविड जमा किया है।
-इस मामले में आने वाले फैसले पर दूसरे राज्यों की नजर है।
-अगर सरकार के पक्ष में फैसला आता है तो दूसरे राज्य भी इस तरह के नियम बना सकते हैं।
No comments:
Post a Comment